श्रीकृष्ण अवतार स्तुति

।। श्रीराधाकृष्ण चरणकमलेभ्यो नम: ।।

श्रीकृष्ण अवतार स्तुति

भए प्रगट गोपाला दीनदयाला, यशुमती के हितकारी
हर्षित महतारी रूप निहारी, मोहन मदन मुरारी

कंसासुर जाना मन अनुमाना, पूतना बेगी पठाई
ते हर्षित धाई मन मुसकाई, गई जहां यदुराई

ते जाय पठाए हृदय लगाए, पयोधर मुख महं दिन्हा
तब कृष्ण कन्हाई मन मुसकाई, प्राण तासू हर लिन्हा

जब इन्द्र रिषाई मेघ पठाई , बस करी ताहि मुरारी
गौअन हितकारी सुरमुनि झारी, नख पर गिरीवर धरी

कंसासुर मारेउ अति हंकारेउ, बत्सासुर संहारी
वकासुर आय उ बहुत डराय उ, बदन बिदारी

ब्रह्म शिव आए अति सुख पाए, मगन भये उ तहं आवें
 यह छंद अनूपा है रसरुपा, जो नर याको गावे

तेहि सम नहीं कोई त्रिभुवन सोई,मनवांछित फल पावे

दोहा
नन्द यशोदा तब कियो मोहन सो चित लाय
देखन चाहत बाल सुख रहयो कहुक दिन जाय







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